दुबई के आईसीसी अकादमी ग्राउंड पर रविवार, 14 दिसंबर 2025 को एक ऐसा मैच खेला गया जिसमें भावनाएँ और रन दोनों बरसे। एसीसी पुरुष युवा एशिया कप 2025 के समूह चरण में भारतीय युवा क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान युवा टीम को 90 रनों से धूल चटाई। भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी की, लेकिन बारिश के कारण 50 ओवर की जगह सिर्फ 49 ओवर में 240 रन बनाए। पाकिस्तान को चाहिए था 241 रन, लेकिन वो 150 रन पर ही ढेर हो गए — एक ऐसा नतीजा जिसने दर्शकों को चौंका दिया, और टीमों के बीच के तनाव को और गहरा कर दिया।
वैभव सूर्यवंशी: बल्लेबाजी में असफल, गेंदबाजी में चाबी
इस मैच का सबसे चर्चित चरित्र था वैभव सूर्यवंशी। पिछले मैच में उन्होंने यूएई के खिलाफ 171 रन की धमाकेदार पारी खेली थी — 9 चौके, 14 छक्के, स्ट्राइक रेट 180। लेकिन यहाँ उनकी बल्लेबाजी धूल में खो गई। पहली ही गेंद पर वो आउट हो गए। छठे ओवर की दूसरी गेंद पर, पाकिस्तान के गेंदबाज मोहम्मद सैयाम ने एक धीमी गेंद से उन्हें कैच-एंड-बोल्ड कर दिया। वैभव ने केवल 6 गेंदों में 5 रन बनाए — स्ट्राइक रेट 83।
लेकिन यहीं नहीं, यहाँ वैभव ने मैच का रुख बदल दिया। 24वें ओवर में, जब पाकिस्तान के कप्तान फरहान यूसुफ (23 रन, 34 गेंद) और हुजैफा अहसान ने 47 रन की मजबूत साझेदारी बनाई थी, तो वैभव ने यूसुफ को कैच आउट करवाया। यह विकेट उस दबाव को तोड़ दिया जो पाकिस्तानी बल्लेबाजी को आगे बढ़ने दे रहा था। वैभव के विकेट के बाद सैयाम ने जश्न मनाया — उसके साथी खिलाड़ी तुरंत उसके चारों ओर जमा हो गए, मानो उसने मैच जीत लिया हो।
भारतीय गेंदबाजी: दीपेश और कनिष्क की जोड़ी ने तोड़ दी पाकिस्तानी टीम
भारतीय टीम की बल्लेबाजी के बाद गेंदबाजी ने असली काम किया। पाकिस्तान की सलामी जोड़ी — उस्मान खान और समीर मिन्हास — ने धीमी शुरुआत की। दोनों ने 30 रन तक ही बल्लेबाजी की, फिर तीन विकेट लग गए।
फिर आए दीपेश देवेंद्रन और कनिष्क चौहान। दोनों ने तीन-तीन विकेट लिए। दीपेश की लेगस्पिन ने बल्लेबाजों को घुमाकर फंसाया, जबकि कनिष्क की तेज गेंदों ने बाहर की ओर खेलने वालों को भेद दिया। पाकिस्तान की टीम ने 41.2 ओवर में सिर्फ 150 रन बनाए — उनके शीर्ष चार बल्लेबाजों में से तीन को 30 रन के अंदर ही बाहर कर दिया गया।
भारतीय बल्लेबाजी: विहान और आरन का बचाव
भारत की बल्लेबाजी भी शुरुआत में टूट रही थी। वैभव के जल्दी आउट होने के बाद, टीम 35/2 पर थी। तब आए आरन जॉर्ज और उप-कप्तान विहान मल्होत्रा। दोनों ने एक साथ 70 रन की जोड़ी बनाई — आरन ने 58 रन बनाए, विहान ने 47। उनकी जोड़ी ने टीम को बचाया, और 15वें ओवर में 100 रन पार करवाए। बाकी बल्लेबाजों ने भी अच्छा योगदान दिया — निश्चित रूप से एक ऐसी पारी जो अगले मैच के लिए आत्मविश्वास बढ़ाएगी।
अगला मुकाबला: मलेशिया के खिलाफ फाइनल ग्रुप मैच
भारतीय युवा टीम अब अपने आखिरी ग्रुप मुकाबले में मलेशिया युवा टीम का सामना 16 दिसंबर 2025 को करने जा रही है। अगर भारत यह मैच जीत जाता है, तो वह टूर्नामेंट के अगले चरण में पहुँच जाएगा। मलेशिया की टीम ने अब तक दो मैच खो दिए हैं — लेकिन यह एक ऐसी टीम है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। युवा क्रिकेट में कोई भी मैच आसान नहीं होता।
क्यों यह मैच खास था?
भारत-पाकिस्तान के बीच कोई भी मैच सिर्फ रनों का नहीं, बल्कि भावनाओं का भी मुकाबला होता है। यहाँ एक ऐसा खिलाड़ी था जिसने पिछले मैच में जीत दिलाई थी, लेकिन इस बार बल्लेबाजी में असफल रहा — और फिर भी उसी ने मैच का मोड़ बदल दिया। यही खेल की असली कहानी है।
इस मैच का असर बहुत गहरा है। पाकिस्तान के लिए यह एक बड़ा झटका है — उनकी टीम अभी तक टूर्नामेंट में कोई जीत नहीं दर्ज कर पाई है। भारत के लिए यह एक बड़ा आत्मविश्वास का संकेत है। बल्लेबाजी में गिरावट के बावजूद, गेंदबाजी ने टीम को बचाया। यही एक अच्छी टीम की पहचान है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
वैभव सूर्यवंशी का पिछला मैच कैसा रहा?
वैभव सूर्यवंशी ने पिछले मैच में यूएई के खिलाफ 171 रन की धमाकेदार पारी खेली थी — 9 चौके और 14 छक्के लगाए, स्ट्राइक रेट 180 था। उस पारी ने उन्हें टूर्नामेंट का सबसे बड़ा बल्लेबाज बना दिया था। लेकिन इस मैच में उनकी बल्लेबाजी बिल्कुल अलग थी — सिर्फ 5 रन, 6 गेंदों में। इस तरह का उलटफेर युवा क्रिकेट में आम है।
पाकिस्तान की टीम क्यों इतनी आसानी से ढेर हो गई?
पाकिस्तान की टीम की शुरुआत बहुत कमजोर रही — सलामी जोड़ी ने 30 रन तक ही बल्लेबाजी की। फिर भी उनके कप्तान फरहान यूसुफ और हुजैफा अहसान ने 47 रन की जोड़ी बनाई। लेकिन वैभव के विकेट के बाद टीम का आत्मविश्वास टूट गया। भारतीय गेंदबाजों ने बल्लेबाजों को घुमाने और दबाव डालने में बेहतरीन काम किया।
भारतीय टीम के लिए अगला मुकाबला क्यों महत्वपूर्ण है?
अगर भारत मलेशिया के खिलाफ जीत दर्ज करता है, तो वह टूर्नामेंट के अगले चरण में पहुँच जाएगा। मलेशिया ने अभी तक दो मैच हारे हैं, लेकिन युवा टीमों में कोई भी मैच आसान नहीं होता। भारत को अब अपनी गेंदबाजी को बनाए रखना होगा — बल्लेबाजी की अस्थिरता को नियंत्रित करना होगा।
इस मैच में किस गेंदबाज ने सबसे ज्यादा विकेट लिए?
दीपेश देवेंद्रन और कनिष्क चौहान ने दोनों ने तीन-तीन विकेट लिए। दीपेश की लेगस्पिन ने बल्लेबाजों को घुमाकर फंसाया, जबकि कनिष्क की तेज गेंदों ने बाहर की ओर खेलने वालों को भेद दिया। यह दोनों गेंदबाज भारतीय टीम के लिए अगले चरण के लिए कुंजी हैं।
बहुत बढ़िया मैच था! भारत की गेंदबाजी ने तो बिल्कुल जादू किया। दीपेश और कनिष्क का जोड़ा बस अद्भुत था।
वैभव सूर्यवंशी को अभी भी बल्लेबाजी का दौर चल रहा है या फिर उसकी गेंदबाजी में बदलाव आ गया है ये तो समझ में नहीं आता। इस तरह के खिलाड़ी तो टीम का भाग्य बदल देते हैं।
ये मैच देखकर लगा जैसे भारत और पाकिस्तान के बीच का सिर्फ खेल नहीं बल्कि एक अहसास भी है। वैभव ने बल्ले से नहीं गेंद से जीत दिलाई - ये तो असली क्रिकेट है।
पाकिस्तान की टीम तो हमेशा की तरह अंदर से टूट गई। वैभव के विकेट के बाद उनका आत्मविश्वास गायब हो गया। ये नहीं कि भारत बहुत अच्छा खेला बल्कि पाकिस्तान बहुत खराब खेला।
इस तरह के मैच युवा क्रिकेट की असली शक्ति को दर्शाते हैं। एक खिलाड़ी की असफलता और फिर उसकी वापसी - यही तो खेल की आत्मा है।
देखिए ये बात बहुत महत्वपूर्ण है - वैभव ने बल्लेबाजी में असफलता से नहीं डरा, उसने अपनी गेंदबाजी में अपनी जगह बनाई। ये तो वाकई बड़ी बात है। कई खिलाड़ी एक असफलता के बाद खेल छोड़ देते हैं, लेकिन वैभव ने अपने दिमाग को बदल दिया। इसी तरह की मानसिकता वाले खिलाड़ी ही भविष्य के स्टार बनते हैं। ये टीम का दिल था, न कि सिर्फ हाथ।
ये मैच जैसे कोई गीत हो - शुरुआत धीमी, बीच में तनाव, फिर एक अचानक ताना जो सबको चौंका दे। वैभव का विकेट वही ताना था।
मैच के बाद की विश्लेषण यही है कि भारत की बल्लेबाजी अस्थिर थी, लेकिन गेंदबाजी ने टीम को बचाया। इसलिए अगले मैच में बल्लेबाजी को सुधारना होगा, लेकिन गेंदबाजी को बरकरार रखना जरूरी है।
हमारे बल्लेबाजों को तो अब अपनी बल्लेबाजी के लिए ड्रामा नहीं बल्कि वास्तविकता सीखनी पड़ेगी। वैभव के जैसे खिलाड़ी अगर बल्ले से नहीं जीत सकते तो गेंद से जीत दें तो उसे नाम दें नायक? ये बस टीम का बचाव है न कि जीत।
वैभव के विकेट के बाद पाकिस्तानी खिलाड़ी जैसे डर गए। उनके चेहरे पर एक अजीब सी खालीपन था। ऐसा लगा जैसे उनकी टीम का आत्मविश्वास उस एक विकेट में टूट गया।
भारत ने जीता लेकिन बल्लेबाजी ने नहीं जीती गेंदबाजी ने जीती। ये बात सबको याद रखनी चाहिए।
ये सब तो बस एक नाटक है। वैभव को तैयार किया गया था ताकि उसकी असफलता के बाद वह विकेट ले सके। ये नियोजित नाटक है। जाने कौन लिख रहा है इसका स्क्रिप्ट।
भारत ने जीता बहुत बढ़िया लेकिन आरन और विहान की जोड़ी तो बस जबरदस्त थी। दोनों ने टीम को बचाया।
वैभव के विकेट के बाद सैयाम का जश्न देखकर लगा जैसे उसने खुद विकेट लिया हो। लेकिन वैभव ने वो विकेट लिया। इस तरह के खिलाड़ी को बस जगह दो और वो तुम्हारी टीम का बचाव कर देगा।
अगला मैच मलेशिया के खिलाफ बहुत महत्वपूर्ण है। गेंदबाजी को बरकरार रखो और बल्लेबाजी को थोड़ा अधिक जीत के लिए तैयार करो। ये टीम बहुत बड़ा कर सकती है।